कविता · लेख · संस्मरण · प्रवासी मन · विशेष — गीतांजलि सक्सेना का संपूर्ण लेखन संग्रह
"गुरु-गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय" — भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी महिमा और डिजिटल युग में गुरु की प्रासंगिकता।
उतार-चढ़ाव भरी हिचकोले खाती नौका, हिम्मत विश्वास पतवार ने किनारे दिखाए — माँ को जन्मदिन पर समर्पित।
कॉफी मॉर्निंग्स, पापा की जीवनशैली और एक शख़्सियत की अनूठी विरासत — ९७वें जन्मदिन पर श्रद्धांजलि।
स्वास्थ्य ही सच्ची दौलत है — नेक तंदुरुस्ती लाख नियामत। जानें कैसे करें अपने स्वास्थ्य में सबसे स्मार्ट निवेश।
जीवन के १४ दार्शनिक निबंध — अनुभव, प्रेम, संबंध और आत्म-खोज के रंगीन पहलू।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की ज़ुबानी स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण जानकारियां — ६ स्वास्थ्य लेखों का संग्रह।
शब्दों के बिछाए चक्रव्यूह में घुसने का दुस्साहस सिर्फ कलम ही तो कर सकती है — लेखों का संग्रह।
परदेस में बसी हर खुशी में छुपी है देस की खुशबू — प्रवासी जीवन की अनकही कहानियां।
२३ कविताओं का संग्रह — प्रेम, प्रकृति, देश और जीवन के अनेक रंग। शब्दों का प्रवाह, भावनाओं का उफान।
"तू ही तो शक्ति, है ईश्वरीय वरदान!" — स्त्री के संघर्ष, साहस और शक्ति का काव्य-चित्रण।
डॉ. अनिल सक्सेना की स्मृति में — परिवार की श्रद्धांजलि। पिताजी के साथ बिताए अनमोल पलों की यादें।
डॉ. अनिल सक्सेना द्वारा लिखी गई क्षणिकाओं का संग्रह — परिवार द्वारा संकलित एक विशेष श्रद्धांजलि।