या
संस्मरण

यादों में रहेंगे बसे...

यादों में रहेंगे बसे… एक शख़्सियत

कॉफीशॉप के गलियारों में अब अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है। ऐसा लगता है, मानो लोगों ने इस ओर आना छोड़ दिया हो। कहां गुम हो गई, वो चहल पहल, वो दरबान के दरवाजा खोलते ही उठने वाली कॉफी की दिलकश सुगंध? एक रूहानी नशा, दोस्तों साथ बैठकों की वजह। गपशप करने के वो सामाजिक अड्डे… जहाँ देश के लिए हो या समाज की परिवर्तनकारी नीतियों की रूपरेखा तैयार हुआ करती थी। वही राजनीति की बहस संग ठहाकों की गूंज, और सिगार के धुएं में लिपटे विचार उड़ा करते थे। जिन्हें हम ढूंढ रहे है… अब बस यादों में समाए हैं।

Coffee Mornings पापा की जीवनशैली का अहम हिस्सा थी। उनके साथ बिताए इन लम्हों का अनुभव का अहसास हमारे हिस्से में भी आया। मुझे भी अनेकों बार खुशनुमा जाड़ों की दोपहर में उनके इस शौक या कहे आदत, साथ कॉफी पीना, उन पलों का आनंद अनमोल था। पापा से ही हमने कॉफी के महत्व और फायदे की शिक्षा ग्रहण की।

परिवार में आज भी पापा की अनुपस्थिति की कमी हर कोई महसूस करता है। उनकी शख़्सियत की सबसे बड़ी खूबी थी उनकी सहजता व सरलता। हर विषय पर लिखने और उसे सटीकता से व्यक्त करने में महारत हासिल थी।

आज शब्दावली भी लाचार से लगती है। पापा की अनुपस्थिति में मानों शब्दों की वर्णमाला भी अपनी क्षमताओं की शक्ति से वंचित है। ऐसा लगता है कि शब्दों ने अपनी इठलाने की आदत छोड़ दी हैं।

न जाने क्यों? पापा के ९७वे जन्मदिन पर उन्हें 'बाबूजी' कह कर याद करने का मन कर रहा है। शायद इसलिए वह अपने पिताजी को इसी संबोधन से पुकारते थे। हमारे बाबा के बारे में अनगिनत अनसुनी कहानियाँ और उनके साथ बिताए अनुभव पापा अक्सर हम सब के साथ साझा किया करते थे।

"Doing very well. But… Why so much labor, once it is confirmed that you are good writer/journalist. Do it when you find something good or bad in any society or country. WELL DONE! PaPa."
— Written on 7th April 2021

उपयुक्त लाइनें उन्होंने दैनिक भास्कर से जुड़े कार्यकाल के दौरान प्रकाशित हुए मेरे लेखों की सराहना करते हुए लिखी थी। उनके विश्वास दिशा-निर्देशों ने ही Mereshabd.com के माध्यम से इस सफर को एक लक्ष्य तक पहुंचने का साहस दिया।

उनकी प्रेरणादायक विचारधारा… उनके हर एक शब्द, सुझाव और हिदायत में एक गहरा संदेश होता था। उनकी बातें आशाओं से भरी होती थी। अगर हम सब ने मुश्किलों का सामना करना उनसे सीखा है, तो जीवन को जीने का अंदाज भी उन्हीं से विरासत में पाया।

'शब्दों की ताकत' से लड़ना सीखा, गिर कर सम्हलना… चुनौतियों का सामना करने में ही छुपी है हमारी काबिलीयत की कुंजी। यही तो थी उनकी विचारधारा।

लम्बे समय से अप्रवासी होने के कारण मैं उनके दिल के ज्यादा करीब रही। शब्दों का प्रयोग चाहे सरल हों, लेकिन जब वे बड़ों से आशीर्वाद के रूप में प्राप्त हों, तो अत्यंत महत्वपूर्ण व खास हुआ करते हैं। उनके साथ बिताए अनगिनत पल और सुनाई गई कहानियां आज भी हमारे बीच प्रचलित है… खयालों में ही सही, यादों में रहेंगे बसे और उनकी प्रेरणा हमारा जीवन हमेशा रौशन करती रहेगी।

— गीतांजलि सक्सेना, 12 July 2025

विषय: संस्मरण पारिवारिक गीतांजलि सक्सेना
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