Gitanjali Saxena
नवभारत टाइम्स की पत्रकार · PIB-मान्यता प्राप्त · जयोति संपादक
सिर्फ शब्दों से खिलवाड़ ही नहीं, माला में पिरोना भी है फ़ितरत। कभी भी न थमने वाला लेखन सिलसिला यूं ही जारी रहेगा हमेशा...
पूरा परिचय पढ़ें →"गुरु-गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय" — भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी कहानी...
परदेस में बसी हर खुशी में छुपी है देस की खुशबू...
स्त्री के संघर्ष और शक्ति का काव्य-चित्रण...
शब्दों का प्रवाह, भावनाओं का उफान...
"सिर्फ शब्दों से खिलवाड़ ही नहीं,
माला में पिरोना भी है फ़ितरत,
कभी भी न थमने वाला लेखन
सिलसिला यूं ही जारी रहेगा हमेशा..."